अगर आपने भाग १ नहीं पढ़ा है तो यहाँ क्लिक करें – भगवान शिव की महिमा – भाग १
भगवान शिव की महिमा भाग 2, में हम जानेंगे शिवलिंग के अनेक प्रकार और उनके शास्त्रीय माहात्म्य
प्राकृतिक शिवलिंग से लेकर बाणलिंग, नर्मदेश्वर शिवलिंग, पार्थिव और पारद शिवलिंग तक और विभिन्न पदार्थों से बने शिवलिंग।

“सर्वो वै रुद्रस्तस्मै रुद्राय नमो अस्तु । पुरुषो वै रुद्र: सन्महो नमो नमः । विश्वं भूतं भुवनं चित्रं बहुधा जातं जायमानं च यत्। सर्वो होष रुद्रस्तस्मै रुद्राय नमो अस्तु ।”
जो रुद्र उमापति हैं वही सब शरीरोंमें जीवरूप से प्रविष्ट हैं, उनके निमित्त हमारा प्रणाम हो। प्रसिद्ध एक अद्वितीय रुद्र ही पुरुष है, वे ब्रह्मलोक में ब्रह्मारूप से, प्रजापतिलोक में प्रजापतिरूप से, सूर्यमण्डल में वैराटरूपसे तथा देह में जीवरूप से स्थित हैं—उस महान् सच्चिदानन्द स्वरूप रुद्र को बारम्बार प्रणाम हो । समस्त चराचरात्मक जगत् जो विद्यमान है, हो गया है, तथा होगा, वह सब प्रपञ्च रुद्र की सत्ता से भिन्न नहीं हो सकता, यह सब कुछ रुद्र ही है, इस रुद्रके प्रति प्रणाम हो।
शिवलिंग के प्रकार और उनका माहात्म्य
भाग २ में हम जानेंगे की भगवान् शंकर की पूजा उपासना के लिए कितने प्रकार के लिंग होते हैं और किस प्रकार की कामना के लिए शिव लिंग के किस रूप की पूजा की जानी चाहिए , इससे भगवान शिव के अनेक भक्तों को लाभ होगा।
शिवलिंग दो प्रकार के होते हैं
1.अकृतिम (प्राकृतिक रूप से निर्मित)
2.कृतिम (कृत्रिम रूप से पत्थर या विभिन्न धातुओं से मूर्तिकार द्वारा निर्मित)
ऊपर बताए गए दोनों भी दो प्रकार के होते हैं चल और अचल (चल वे होते हैं जिन्हें स्थानांतरित किया जा सकता है और अचल वे होते हैं जिन्हें कहीं और नहीं ले जाया जा सकता)
अकृतिम (प्राकृतिक रूप से निर्मित) शिवलिंग
आकृतिम लिंगों में अलग-अलग प्रतीक चिन्ह दिखाई देते हैं, जो प्राकृतिक हैं और मनुष्यों द्वारा नहीं बनाए गए हैं, ज्यादातर शिव लिंग के नाम प्रदर्शित चिन्हों के आधार पर होते हैं। आकृतिम लिंग 5 प्रकार के होते हैं –
- स्वयंभू लिंग प्राकृतिक रूप से निर्मित होते हैं और उनकी बाहरी सतह पर अलग-अलग छवियां दिखाई देती हैं, उनका आकार अलग-अलग होता है और जिसके आधार पर उनके नाम रखे जाते हैं, वे हैं ब्रह्म लिंग, ऐन्द्र लिंग, आग्नेय लिंग, यम लिंग, नैऋत लिंग, वरुण लिंग, वायव्य लिंग, कौबेर लिंग, ईशान लिंग
- दैवलिंग
- गोल लिंग (या गोलक लिंग)
- आर्य लिंग– यज्ञोपवीत प्रतीक
- मानस लिंग – 3 प्रकार रौद्र लिंग, शिवनाभि लिंग और बाण-लिंग

अकृतिम – मानस लिंग
मानस लिंग के तीन प्रकार होते हैं – रौद्र लिंग, शिवनाभि लिंग और बाण लिंग
रौद्र लिंग का निर्माण प्राकृतिक रूप से तेज गति से नदी के पानी के प्रवाह से पानी के तेज घर्षण के कारण होता है।
शिवनाभि लिंग – यहां शिव लिंग की वेदी (आधार) पर सुदर्शन चक्र का चिन्ह होता है, शिवनाभि लिंग श्रेष्ठ लिंगों में आते हैं ।
बाण लिंग नर्मदा नदी में स्थित रौद्र लिंग हैं (जो तेज़ गति से बहने वाले जल के घर्षण से बनते हैं)। नर्मदा नदी के जल से निर्मित सभी शिवलिंगों को बाण लिंग या नर्मदेश्वर शिवलिंग कहा जाता है।
नर्मदेश्वर शिवलिंग की महिमा गृहस्थ भक्तों के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण है, जिसके बारे में हम आगे जानेंगे ।
अकृतिम – बाण-लिंग या नर्मदेश्वर शिवलिंग
बाण-लिंग का आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है, इसलिए इस पर विस्तृत चर्चा आवश्यक है।
शिव पुराण में विभिन्न शिवलिंगों को उनके आध्यात्मिक और भौतिक दोनों लाभों के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। लिंग की श्रेष्ठता का क्रम (जिस पदार्थ से वह बना है, उसके आधार पर) निम्नलिखित है:
मिट्टी, गोबर, पार्थिव या मिट्टी आदि कोमल पदार्थों से बने लिंगों की तुलना में पाषाण (पत्थर) लिंग श्रेष्ठ होता है, पाषाण (पत्थर) लिंग की तुलना में स्फटिक (क्रिस्टल) लिंग श्रेष्ठ होता है, इसी प्रकार आरोही क्रम में श्रेष्ठता इस प्रकार है – स्फटिक -> पद्मराग मणि – > पुष्पराग मणि – >, पुखराज -> गोमेद -> मूंगा -> मोती -> चांदी -> सोना -> हीरा -> पारद। शास्त्रों में पारद लिंग को शिव के अत्यंत शक्तिशाली रूप रुद्र का वीर्य कहा जाता है और बाण-लिंग पारद लिंग से भी अधिक श्रेष्ठ है।

सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार, लाखों रत्न लिंगों (रत्नों, सोने-हीरे से बने लिंग) की पूजा का फल एक पारद शिवलिंग की पूजा के बराबर है। और लाखों पारद शिवलिंगों की पूजा का फल केवल एक बाण लिंग – नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा के बराबर है।
सनातन धर्म शास्त्रों में समग्र मार्गदर्शन यह कहता है कि प्राकृतिक रूप से निर्मित शिवलिंग मानव निर्मित शिवलिंग से श्रेष्ठ हैं और पारद जो सबसे श्रेष्ठ रूप है, वह भी मानव निर्मित है।

अकृतिम (प्राकृतिक रूप से निर्मित) –
बाण-लिंग (नर्मदेश्वर शिवलिंग) के बारे में जानने योग्य महत्वपूर्ण बातें
वैदिक साहित्य में उल्लेख है कि भगवान शिव प्रत्येक नर्मदेश्वर शिवलिंग में विद्यमान हैं। वे अत्यंत दयालु और शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं, जो इस बाण-लिंग रूप में सभी सांसारिक और आध्यात्मिक, दोनों ही इच्छाओं की पूर्ति करते हैं। नर्मदेश्वर की पूजा का एक और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि प्राण प्रतिष्ठा, आवाहन, विसर्जन की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि भगवान शिव माता पार्वती अभिन्न रूप से प्रत्येक नर्मदेश्वर शिवलिंग में अवस्थित होते हैं ।
बाण-लिंग (नर्मदेश्वर शिवलिंग) के प्रकार और उनकी पूजा का लाभ:
बाण लिंगों पर अद्भुत चित्र और सनातन धर्म के प्रतीक होते हैं जो प्राकृतिक रूप से लिंग पर बनते हैं।
इंद्र लिंग: यदि वज्र चिह्न दिखाई दे तो उसे इंद्र लिंग कहते हैं। इंद्र लिंग की पूजा करने से व्यक्ति शासक बन जाता है।
आग्नेय लिंग: भाले के प्रतीक वाले लिंग और/या अग्नि के रंग से चमकते और दीप्तिमान लिंगों को आग्नेय लिंग कहते हैं। इस लिंग के आशीर्वाद से उपासक तेजस्वी और शक्तिशाली बन जाता है।
वारुण लिंग: गोलाकार कृष्णवर्ण (भौंरा के समान) लिंग को वारुण कहते हैं इनके पूजन से सत्व-गुण, सुख–सौभाग्य आदि की वृद्धि होती है ।
वैष्णव लिंग: जिस लिंग में भगवान् विष्णु के आयुध शंख चक्र गदा पद्म आदि चिन्ह बने हों या गरुड़ , विष्णु जी का चरण चिन्ह द्रिष्टिगोचर हों उन्हें वैष्णव लिंग कहते हैं, इनकी पूजा से सभी प्रकार के ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
अगर नर्मदेश्वर लिंग में शालिग्राम शिला जैसे या चन्द्रमा का चिन्ह हो, ऐसे लिंग के पूजन से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। अगर नर्मदेश्वर शिवलिंग में पद्म, स्वस्तिक अथवा श्रीवत्स के चिन्ह हो तो अमित ऐस्वर्य की प्राप्ति होती है ।
त्रिलोचन लिंग : शुक्ल वर्ण के शिवलिंग जिसमें त्रिनेत्र चिन्ह हो. इनके पूजन से सभी पापों का क्षय हो जाता है
अर्धनारीश्वर नर्मदेश्वर शिवलिंग: त्रिशूल डमरू आदि के चिन्ह हो और आधा भाग शुभ्र-वर्ण का तथा आधा रक्त वर्ण का हो उन्हें अर्धनारीश्वर लिंग कहते हैं, ये मनुष्यों की सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं ।
समस्त बाणलिंगों में जितने भी चिन्ह और लक्षणों का वर्णन किया गया है , उनमें से कई चिन्ह या केवल एक चिन्ह भी किसी बाण–लिंग में स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो तो उस शिवलिंग के पूजन से सकल मनोरथ पूर्ण होते हैं ।
कृत्रिम लिंग
कृत्रिम लिंग धातु, रत्न, पत्थर / शिला आदि से मूर्तिकारों द्वारा बनाये जाते हैं और इसीकारण इनके असंख्य प्रकार हैं । कृत्रिम शिवलिंगों के कुछ प्रकार और उनका महत्व निम्नलिखित है:
- शिला / पत्थर से बने शिवलिंग – पूजन से मोक्ष प्राप्ति संभव है
- पार्थिव शिवलिंग जो मिट्टी से बनाये जाते हैं उनका बहुत महत्त्व है, पार्थिव शिवलिंग पूजन का शास्त्रों में विधि विधान है, और अगर कामना हेतु विधिवत पार्थिव लिंग पूजन किया जाये तो वे और भोग और मोक्षदाता कहे गए हैं।
- स्वर्ण लिंग – स्वर्ण धातु से निर्मित शिवलिंग पूजन से लक्ष्मी स्थिर रहतीं हैं और राज्य आदि की प्राप्ति होती है।
- ताम्र लिंग पूजन से संतान की उन्नति , वृद्धि होती है।
- पारद शिवलिंग – कृत्रिम शिवलिंगों में पारद शिवलिंग की बहुत महिमा पहले भी बतायी गयी है, करोड़ों रत्न लिंगों के पूजन का जो फल है वह १ पारद शिवलिंग पूजन से मिलता है, पारद निर्मित शिवलिंग बनाने की विधि शास्त्रों में वर्णित है जानकार भक्तजन निर्माण करना जानते हैं, पारद शिवलिंग पूजन से अतुल ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है ।
- हीरे और स्फटिक शिवलिंगों से भी सभी कामनाओं की पुरतु संभव है।
इसके अलावा कई शिवलिंग अनाज से गुड़ से, गंध लिंग जो कस्तूरी, चन्दन, केसर आदि से बनाया जाता है, पुष्प लिंग जो पुष्पों से, अश्वगंधा आदि जड़ी बूटियों से, बालू, लवण, शर्करा गेहूं, धान , तिल, गौ घी (घृत), गौ – गोबर (पृथ्वी में गिरा हुआ न हो), दूर्वा, भस्म, आमला, कपूर, आदि अनेक वस्तुओं से अलग अलग कामना पूर्ति के लिए शिवलिंग निर्माण एवं पूजन की विधि शास्त्रों में दी गयी है, जिनसे ऐसी कोई भी मनोकामना नहीं जो पूर्ण न हो सके।

==============================
Ref: Shiv Puran

Anupam Trivedi has spent over three decades studying and reflecting upon Sanatan scriptures, including the Vedas, Upanisads, Itihāsa, and Purāṇas. He writes on cultural philosophy and ancient literature to present traditional insights with accuracy and clarity. Read full bio →
Very nice
Deva Di Dev Mahadev Bhagwan Shiv ke niraakaar Swaroop Shivling ke bare mein bahut hi Rochak Jankari prapt Hui
भगवान शिव कि स्तुति kis प्रकार कर सकते हे कृपया इस पर भी एक लेख लिखे भाई ji. अति सुन्दर लेख । धन्यवाद
sure there are many extremely powerful strotra’s short and easy to remember I shall be writing part 3 on this .