क्या आप जानते हैं – दीपावली रावण वध से भी पहले मनाई जाती थी! –
🌟 आनंद रामायण का एक अद्भुत रहस्य 🌟

हम सब यह जानते हैं कि दीपावली का आरम्भ उस दिन से माना जाता है जब भगवान श्रीराम रावण-वध कर 14 वर्ष के वनवास के पश्चात अयोध्या लौटे।
आनंद से अभिभूत अयोध्या-वासियों ने दीपक प्रज्ज्वलित कर अपने प्रिय प्रभु का स्वागत किया और यह परम्परा युगों से चलती आ रही है। यह सत्य है, पर यह इस महापर्व के महत्व और उत्सव मनाने के कुछ और कारण भी हैं।
बहुत कम लोगों को यह ज्ञात है कि दीपोत्सव की परम्परा श्रीराम के अयोध्या लौटने से पहले भी विद्यमान थी। इसका उल्लेख हमें “आनंदरामायण” नामक प्राचीन ग्रन्थ में मिलता है। जी हाँ! यह अद्भुत रहस्य हमें आनंद रामायण से ज्ञात होता है — एक ऐसा ग्रंथ जो श्री राम कथा के कम प्रसिद्ध लेकिन गूढ़ और अलौकिक प्रसंगों को उजागर करता है।
सत्य यह है कि कार्तिक माह की अमावस्या की यह तिथि, युगों-युगों से कई अन्य ऐतिहासिक और धार्मिक कारणों से ‘दीपोत्सव’ (रोशनी का उत्सव) के रूप में मनाई जाती रही है। श्री राम का अयोध्या आगमन भी इसी शुभ और पवित्र तिथि पर हुआ, जिसने इस पर्व के गौरव को चरम पर पहुँचा दिया।
आइए, आनंद रामायण और अन्य शास्त्रों के आधार पर, इस बहुआयामी पर्व के अनसुने रहस्यों को जानें:
इस नीचे दिए चित्र में आनंद रामायण के सारकाण्ड के चतुर्थः सर्गः से (पृष्ठ-३४,३५) में विवरण है। राजा जनक महाराज दशरथ को सकुटुम्ब, मंत्रियों सहित दिवाली पर्व के उत्सव पर मिथिला आने का निमंत्रण दे रहे हैं ।

आनंद रामायण का यह प्रसंग इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि यह दीपोत्सव रावण वध से पहले भी मनाया जाता था। यह प्रसंग सीता-राम विवाह के कुछ समय बाद का है, जब श्रीराम-सीता अयोध्या लौट चुके थे।
राजा जनक ने अपने परम प्रिय जामाता श्रीराम और पुत्रवधू सीता सहित समस्त अयोध्या-राजपरिवार को आमंत्रित कर दीपोत्सव महोत्सव का आयोजन किया। पाठ में यह भी स्पष्ट है कि यह दीपोत्सव “शुभ मुहूर्त में सम्पूर्ण राजाओं, ऋषियों और जनसमाज के बीच” संपन्न हुआ।
अन्य शाश्वत कारण जो कार्तिक अमावस्या तिथि को महान बनाते हैं
दीपावली की तिथि (कार्तिक अमावस्या) को स्वयं ही पवित्र बनाने वाले कुछ अन्य महत्वपूर्ण कारण भी हैं, जो इसे एक वार्षिक, बहु-कारण पर्व बनाते हैं:
देवी लक्ष्मी का प्राकट्य: यह माना जाता है कि इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान धन और ऐश्वर्य की देवी, माता लक्ष्मी, प्रकट हुई थीं। इसलिए इस तिथि पर उनकी पूजा की जाती है।
श्री कृष्ण द्वारा नरकासुर वध: चतुर्दशी को श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था, और इसी खुशी में अमावस्या को दीपोत्सव मनाया जाता है, जिसे छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी) के रूप में जाना जाता है।
राजा बलि का वरदान: भगवान वामन की दानवीरता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने राजा बलि को वरदान दिया कि वे प्रतिवर्ष एक दिन अपनी प्रजा से मिलने पृथ्वी पर आ सकेंगे। राजा बलि के पृथ्वी पर लौटने की खुशी में उनकी प्रजा दीप जलाकर उनका स्वागत करती है।

Anupam Trivedi has spent over three decades studying and reflecting upon Sanatan scriptures, including the Vedas, Upanisads, Itihāsa, and Purāṇas. He writes on cultural philosophy and ancient literature to present traditional insights with accuracy and clarity. Read full bio →
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Thanks for your message plwaae also see रामायण कितनी हैं ? क्या विशेष है “आनंद रामायण” में (भाग-3) very few people know about anand रामायण
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