क्या धनतेरस में आप भी बर्तन, सोना, चांदी खरीदते हैं ?
धनतेरस (धन–त्रयोदशी)
दीपावली के दो दिन पहले (समुद्र मंथन समय) धन्वंतरि भगवान प्रकट हुए त्रयोदशी तिथि (अर्थात -१३ – तेरहवें दिन) इसलिए तेरहवें दिन का तेरस (त्रयोदशी का “तेरस”) और भगवान विष्णु के अवतार धन्वन्तरि जी का “धन” मिला कर कहा गया “धन–तेरस” ।
धनतेरस का धन, सोना, चांदी और बर्तन से सम्बन्ध नहीं है !
धनतेरस का न कोई धन से सम्बन्ध है न सोना चांदी और बर्तन से और इसलिए धनतेरस के दिन अगर आप सोना चांदी बर्तन आदि खरीदते हैं उसका शास्त्रों के अनुसार कोई भी महत्व नहीं है ।
धन्वंतरि भगवान तीन वस्तुओं को लेकर समुद्र से प्रकट हुए।
१. त्रिफला औषधि – समस्त प्रकार की औषधीय का मूल “हरड, बहेड़ा आंवला” जिसको त्रिफला कहते हैं
२. अमृत कलश और
३. आयुर्वेद ग्रन्थ
धनतेरस के दिन धन्वंतरि भगवान का अवतार हुआ इस दिन भगवान धन्वंतरि का पूजन करना चाहिए!
उनसे आरोग्य की कामना करनी चाहिए की हमारे जीवन में आरोग्यता हो हम अमृत-तत्व को प्राप्त करें हम भी अमर हो जाएं अमर होने का मतलब हम जन्म-मरण के बंधन से छूट जाएँ …अर्थात मोक्ष प्राप्ति / भगवान् की प्राप्ति हो जाये ।
मोक्ष प्राप्ति का अर्थ भगवान् के धाम में वास जहाँ से कभी वापस पृथ्वी पर जन्म नहीं होता, तो जब जन्म नहीं होगा तो मरेंगे भी नहीं उसी को अमर होना कहते हैं । इस भावना से धनतेरस के दिन धन्वंतरि भगवान की पूजा करनी चाहिए ।
Anupam Trivedi has spent over three decades studying and reflecting upon Sanatan scriptures, including the Vedas, Upanisads, Itihāsa, and Purāṇas. He writes on cultural philosophy and ancient literature to present traditional insights with accuracy and clarity. Read full bio →