श्री गणेश भगवान् की विलक्षण महिमा !!!
भाग १ – भगवान् गणेश की अग्रपूजा (प्रथम-पूज्य) का रहस्य
सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः । लम्बोदरश्च विकटो विघन्नाशो विनायकः ।।
धुम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः । द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छुणुयादपि ।।
विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा । सङ्ग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते ।।
शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम् । प्रसन्नवदनं ध्यायेत्सर्व विघ्नोपशान्तये ।।
अभीप्सितार्थ सिद्ध्यर्थ पूजितो यः सुरासुरैः । सर्वविघ्नहरस्तस्मै श्री गणाधिपतये नमः ।।
श्री गणेश!!! सर्वविघ्नहरता, सर्वकामफलप्रद अनंतानंदसुखद सुमङ्गलमङ्गल
भगवान श्री गणेश साधारण देवता नहीं हैं। वे साक्षात अनंत-कोटी ब्रह्माण्डनायक जगन्नियन्ता परात्पर ब्रह्म ही हैं। ओंकारस्वरूप परब्रह्म होने साथ बुद्धि के अधिष्ठात्र देवता हैं। श्री गणेश ३३ कोटि देवी देवताओं के परम आराध्य हैं। पंच-देवों (गणेश जी, विष्णु जी, दुर्गा जी, शंकर जी और सूर्यदेव) में प्रथम पूज्य हैं ।
सृष्टि के पांच महत्वपूर्ण कार्यों के पांच अधिष्ठात्र देवता हैं। जिनकी पूजन का विधान सनातन धर्म शास्त्र में हैं।
१) सृष्टि की उत्पत्ति – सूर्यदेव (हिरण्यगर्भ ब्रह्मा),
२) सृष्टि का संचालन / पोषण – भगवान् विष्णु
३) सृष्टि का संहार – भगवान् शिव
४) सृष्टि में निग्रह कार्य – भगवती दुर्गा
५) सृष्टि में अनुग्रह कार्य – भगवान् गणेश
सृष्टि की सुचारु व्यवस्था के लिए विघ्नों का विभाग श्री गणेश जी के पास हैं । सत्कर्म , पुण्यकर्म आदि में भगवान् गणपति भक्तों के कार्य निर्विघ्न पूर्ण कर देते हैं । भक्तों के कार्यों में विघ्नों को हरना, उनका सब प्रकार से मंगल करना ही भगवान् गणपति का अनुग्रह हैं ।
पाप परायण कर्म, अभक्तों के दूसरों को पीड़ा पहुंचाने वाले कर्म, आसुरी कर्म आदि में भगवान् गणेश अनेक प्रकार के विघ्न उपस्थित कर देतें हैं और उनके कुत्सित मनोरथ विफल कर देते हैं ।
….इसीलिए श्री गणेश सर्वविघ्नहरता, सर्वकामफलप्रद अनंतानंदसुखद सुमङ्गलमङ्गल कहे जाते हैं।
भगवान् गणेश की अग्रपूजा (प्रथम-पूज्य) का रहस्य
हम कोई भी काम चाहे बड़ा हो या छोटा शुरू करते समय “यह सफल हो” यही सोचते हैं। दूसरे शब्दों में कोई भी कार्य करने से पहले “यह असफल न हो” यह सोचते हैं । एक ही बात दो तरह से कहने का कारण हैं – इन दोनों बातों में “शुरू करते समय” या “कार्य प्रारम्भ के समय” महत्त्व पूर्ण हैं, अर्थात हम कोई भी कार्य विशेषकर बड़े कार्य करने से पहले प्रारम्भ में ही यह सुनिश्चित करना चाहते हैं की हम इस कार्य में सफल हों । हम बिना सोचे कोई भी काम ऐसे ही नहीं शुरू कर देते की अगर कोई विघ्न समस्या आएगी तब देखेंगे ।
कार्य सफल न होने के कारण को ही हम विघ्न कहते हैं। अर्थात कोई भी कार्य सफल नहीं हो रहा उसका कारण कुछ भी हो वह विघ्न/ बाधा कहलाएगी।
और इसी कारण से कार्य के प्रारंभ में ही हम कोई विघ्न बाधा न आये उसको सुनिश्चित करते हैं । विघ्न बाधाओं को हरण करने का विभाग गणेश जी का हैं तो कार्य शुरू करने के पूर्व सर्वप्रथम भगवान् गणपति का पूजन किया जाता हैं ।
इन वक्तव्यों से हमने समझा की कोई भी कार्य सफल हो उसके लिए विघ्न बाधा न उत्पन्न हो यह सबसे अधिक महत्त्व पूर्ण हैं । और विघ्नहरता गणपति हैं इसलिए कार्य सफलता के लिए कार्य प्रारंभ के समय गणेश जी का सर्वप्रथम पूजन किया जाता हैं
सृष्टि सुचारु रूप से चले इसके लिए विघ्नों का हरण सबसे अधिक महत्वपूर्ण
इससे दो बातें सिद्ध हुईं
१)विघ्नों का हरण सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं, किसी भी कार्य में सबसे पहले विघ्नों का हरण हो यह सुनिश्चित करना आवश्यक हैं…इसीलिए चूँकि विघ्नहर्ता भगवान् गणेश ही हैं इसलिए वे प्रथम पूज्य हैं इस बात को भी दूसरे ढंग से कहें तो- किसी भी कार्य को प्रारंभ करने से पहले प्रथम पूज्य गणेश जी का पूजन आवश्यक हैं जिससे कार्य निर्विघ्न रूप से पूर्ण सफल हो
२)जिन देवता के पास विघ्न हरने का विभाग होगा – प्रथम पूजन उन्ही का होगा। हम सभी कोई न कोई कार्य ही करते हैं हमेशा और सफलता की कामना रहती हैं। सिर्फ मनुष्यों के ही नहीं त्रिदेवों के सभी कार्य और अन्य देवताओं के सभी कार्य भी भगवान् गणेश के अग्रपूजन से ही सफल होते हैं
इस सिद्धांत को समझने के लिए थोड़ा और चिंतन मनन करें भाग २ में इस पर और विस्तार से जानेंगे –
१) विघ्न हरता होने के कारण भगवान् गणेश प्रथम पूज्य हैं ?
२) बुद्धि के अधिष्ठात्र देवता होने के कारण भगवान् गणेश प्रथम पूज्य हैं ?
अति सुन्दर प्रस्तुति हम सभी सनातनियों को धर्म के रहस्यों को जानने कि शुरूवात है, इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों पढना और समझना चाहिए, ऐसी जानकारी आसानी से नहीं मिलती है, इसे व्यर्थ नही जाने देना चाहिए।. धन्यवाद
बहुत ही अच्छा
जय श्री गणेशाय नमः 🙏
Bahut Achcha
Wonderful effort & absolutely need of hour not only to enlighten the generation ‘in charge’ now but to create repository for future generations also. Kudos Anupam.
Excellent effort . Well articulated
Excellent effort . Well articulated . More helpful